एक सूरज नया उगा









पहाड़ी पर डूबता सूरज चारों तरफ लालिमा बिखर रहा था महेन्दर अपनी पलटन के साथ गस्त पर था।बूटों की आवाज उस शांत जगह पर कुछ ज्यादा ही सुनाई दे रही थी।

सभी चौकस चल रहे थे कि तभी महेन्दर  को झाडिय़ों से सरसराने की आवाज आई।

वह चौकन्ना होकर धीरे चलने लगा।आवाज थोड़ी और नजदीक आने लगी।एक कंकड़ वहाँ से उछल कर महेन्दर के लगा।साथ चलते जवान सतर्क हो गए और पोजीशन ले कर खड़े हो गए।

साथी ने झाडियों को रायफल की नोक से हटाने की कोशिश की कि तभी कुछ देख महेन्दर ने उसे रोक दिया।

सावधान होकर वह उस आवाज के नजदीक चला गया.

सामने एक दस साल के बच्चे को देखकर उसके होठों पर मुस्कुराहट आ गई.

वह बच्चा बकरी की रस्सी पकड़े हुए उससे छिपने की कोशिश कर रहा था.

कंकड़ तुमने फेंका था?महेन्दर ने सवाल किया।

लड़के ने हाँ में गर्दन हिला दी।

"पर क्यों?अगर दुश्मन समझ कर गोली चला देते तो आपको लग जाती।।महेन्दर ने समझाते हुए कहा।

हूँह…!कंधे उचकाकर लड़का बोला, और तेजी से भाग गया।महेन्दर और बाकी साथी उसे भागते हुए देखते रहे।

"कमाल का बच्चा है!"एक जवान ने कहा।महेन्दर उसे दूर तक भागते देखता रहा फिर आगे बढ़ चला।

पूरी रात उसकी आँखों के सामने वह बच्चा आता रहा।.कंधे उचकाकर भाग जाना….कुछ था जो उसे याद दिला रहा था।

आँखों के सामने उसका बचपन चलचित्र की तरह आने लगा.

कोई दूर से दौड़ता हुआ आ रहा था उसके कानों में एक आवाज सुनाई देने लगी…;बापू!...बापू….!

आया….!दूसरी ओर से किसी ने दौड़ लगाई.

धुंध सी छट गई।

"बापू देख मैडल मिलिया मैनूं" 

धुंध कुछ छटने लगी.

"शबाशे मेरे शेर पुत्तर!";कहकर गले लगा लिया.

वह खुद है और बापू की बाँहों में कसा हुआ.

वह बलिष्ठ बाँहें जो खेत में फावड़े चला कर खुद पत्थर बन गई थी।उसकी कठोरता में भी एक कोमलता थी पिता के स्नेह की छाया.

"चल घर चलिए तेरी मां उडीकदी होवेगी।"

वह उसके कंधे पर हाथ रखकर अपने साथ ले चल पड़े।

कितना सकून था उन लहलाते खेत की पगडंडी में,फसल की हँसी में।

बापू के तो जैसे प्राण थे इन खेतों में।सब कुछ कितना अच्छा था पर जाने क्यों जीवन में वह स्याह रात आ गई।

"हरदेवा ...हरदेवा….!बाहर से कोई आवाज लगा रहा था.बापू थाली छोडकर उठ खड़े हुए और बाहर की ओर भागे वह भी पीछे हो लिया.

"कि हुआ सितारे?"दालान में खडे हुए सितारे चाचा को देखकर बापू ने पूछा.

"तेरे खेतां दे चारे पासे फौजी खड़े ने...पता नी की लभदे पये।"

वह हड़बडाते हुए बोला।

बापू बिना चप्पल ही खेत की ओर दौड़ पड़े।वह हाथ में चप्पल उठाए बापू के पीछे पीछे भागने लगा।

खेत के चारों तरफ फौजी थे।

उसे देख उन्होंने उसे वहीं रूकने का इशारा किया।

वह पास खडे ट्रक के ओट में हो गया और वहाँ पर मौजूद वायरलेस वाले को देखकर पूछा,

"इथे की हो रिहा है साहब!मेरे खेतां दे चारे पासे इह सब की होइआ?"

"दो दुर्दांत आतंकवादी इस खेत में छिपे है।"उसनें जवाब दिया.

…तुसी किवें कह सकदे हो...मतलब थोनु की पता?बापू ने पूछा

"खबर है तभी कार्यवाही की जा रही है ना!आप इस बच्चे को लेकर यहाँ से जाओ।"एक फौजी ने कहा।

तभी खेत के अंदर से फायर की आवाज आई ..सब चौकन्ने हो गए।वह गोली एक फौजी के बगल से निकल गई।

"हम लास्ट वार्निंग दे रहे हैं.. सभी अपने आप को हमारे हवाले कर दे…!!"

एक फायर की फिर आवाज आई।वह आतंकवादी समर्पण के लिए तैयार न दिखे।

"अग्ग ला दिओ खेत विच...अग्ग ला दो चारे पासे ....."अचानक हरदेव चिल्लाया।

फौजियों का ध्यान हरदेव की ओर गया।ऑफिसर उसके चेहरे की कठोरता को देखकर मुस्कुरा दिए।महेन्दर बापू के जनून को देखकर अंचभित हो गया।

अगले ही पल खेत धूँ धूँ कर जलने लगा।

फायरिंग तेज हो गई…

अचानक हरदेव जमीन पर आ गिरा..महेन्दर इससे पहले की कुछ समझ पाता.. एक जवान ने तेजी से उसे एक तरफ खींच लिया।

हरदेव लहुलुहान था।गोली कंधे में धंसी हुई थी…

आग की रोशनी में वह बस बापू को देख रहा था जिसकी बाँह से खून लगातार बह रहा था।

खेत के अंदर से चीखने की आवाज आने लगी...जलते हुए खेत से बचने के लिए राक्षस फायरिंग करते हुए बाहर निकल कर भागने लगे पर सैनिकों की घेराबंदी मजबूत थी।

उन्हें पकड़कर बांध दिया गया।सैनिकों के चेहरे पर इस ऑपरेशन की सफलता की चमक थी।महेन्दर की नजर बापू के हरदेव की बाँह से बहते खून पर थी।उसका चेहरा गुस्से से लाल हो गया और उसने एक कंकड़ उठाकर सामने खडे फौजी के माथे पर दे मारा।

"आह्!"अचानक से इस चोट से वह फौजी एक पल विचलित हुआ लेकिन महेन्दर को देखकर मुस्कुरा दिया।

जल्द ही हरदेव हस्पताल में था और उपचार शुरू कर दिया गया था।अंधेरा छटने लगा था।

सुबह हस्पताल में आर्मी ऑफिसर मिलने आए साथ में वह फौजी भी था जिसके माथे पर महेन्दर ने पत्थर मारा था।

उस जगह एक बैंडेज लगी हुई थी।महेन्दर उसे देखकर बैड के कोने में सरक गया पर वह सैनिक अब भी मुस्कुरा रहा था।

"लो बेटा!"उसकी तरफ एक बिस्कुट का पैकेट बढाते हुए वह बोला।

"ले ले पुत्तर!"हरदेव ने महेश को कोई प्रतिक्रिया न करते देख कहा।

" पर बापू जी इहनां करके तैनू सट्ट लग्गी!"महेश ने गुस्से से कहा।

"ओये ना ना ना पुत्तरा,,इह की कह दित्ता ? इन्हां ने तां सानूं बचाया जे यह न हुन्दे तां हो सकदा आतंकवादी साडे पुरे पिंड नूं उड़ा दिंदे बारूद नाल.... हरदेव ने कहा।

"ए की कह रहे हो बापू जी!"से उसनें कहा।

"हाँ पुत्तर, यही सच है।इन्होंने पूरे गाँव पूरे देश को बचाया जो यह न होते तो हम सब मरते।हरदेव ने कहा.

"पर बापू साडा खेत ?"

वह  दुखी होकर बोला।

"ओये शेरा ...असीं किसान हाँ दुबारा खेत विच मेहनत करेंगे पर इह फौजी...इन्हां नूं दुबारा मौका नहीं सी मिलना उन्हें दरिन्दिआं नूं फड़न दा ..

जे इह न होण तां देश नहीं बच सकदा।"

"जो यह ना हो तो देश न बचे।"

महेन्दर  के मन से जैसे धूल सी हट गई और वह बिस्कुट लेकर एक तरफ बैठकर खाने लगा।

"मैं भी अपने पुत्तर को सेना में भेजूंगा… मेरा सपना है यह।"हरदेव की आँखों में चमक थी।

ऑफिसर ने हरदेव के कंधे को थपथपाया औ रमहेन्दर के सिर पर हाथ रखकर बाहर निकल गए।

तभी किसी ने उसे जोर से झिंझोडा.

"उठिए सर...उठिए...।";सामने अर्दली खडा था.महेन्दर जल्दी से बाथरूम की ओर भागा।

आज घाटी में नदी के नजदीक के इलाके की पेट्रोलिंग थी।महेन्दर अपनी टूकडी के साथ सावधानी से उस संवेदनशील इलाके की गश्त पर था।

कुछ बच्चे बकरियों के साथ इधर उधर घूम रहे थे.

एक तरफ पगडंडी और दूसरी तरफ नदी का तेज बहाव।पगडण्डी से सटा पहाड़ और घनी झाडियां.

यही वह इलाका था जहां से अक्सर घुसपैठ होती थ।.कुछ स्थानीय लोगों की मदद से आतंकवादी यहाँ से गतिविधियों को अंजाम दे रहे थे।

हर कदम सतर्कता से उठाया जा रहा था तभी किसी के चीखने की आवाज आई।

सैनिकों ने पोजीशन ले ली और ध्यान से सुनने लगे।यह आवाज बच्चों की थी।महेन्दर झाडियों की ओट ले आवाज की दिशा में बढा तो देखा एक बच्चा बकरी के बच्चे को बचाने के लिए नदी की तरफ पेड़ पर लगभग झुका हुआ था।

बाकी बच्चे उसे उतरने के लिए कह रहे थे।महेन्दर ने जल्दी से उस ओर छलांग लगाई और बच्चे को कस कर पकड़ लिया।उसे ऊपर की ओर खींच कर बकरी के बच्चे को भी पकड लिया।

पेड की टहनी कसमसा कर टूट गई और वह नदी में गिर गया।

बच्चों के चीखने की आवाज और तेज हो गई।इतने में और फौजी वहाँ आ गए और स्थिति को समझा।

वह महेश को ढूंढने लगे।दस मिनट बीते होंगे महेन्दर ने पीछे से आकर आवाज दी.

"सब ठीक है परेशान न हो बी अलर्ट….।";वर्दी पूरी गीली हो चुकी थी.बकरी को गोद में उठाए वह बच्चा महेन्दर के पास आया और बोला,

"शुक्रिया बचाने के साथ और कल के लिए माफ करना।";इतना कहकर उसने नजरें झुका ली.

"कोई बात नहीं,नाम क्या है तुम्हारा?"महेन्दर ने कंधे पर हाथ रखकर पूछा.

"राशिद।"वह धीरे से बोला

"अच्छा बताओ,कल पत्थर क्यों मारा था?"उसने   पूछा।

"अम्मी कहती हैं कि आप लोगों ने हमारे ऊपर पर जुल्म किए हैं और हमे यहाँ बंद किया है।"उसनें कहा और खामोश हो गया।महेन्दर उसके चेहरे को देखने लगा।

राशिद ने चेहरा ऊपर उठाया और बोला,

"आप क्यों हो यहाँ पर?"

"अच्छा यह बताओ अगर हमनें आपको बंद किया होता तो क्या आप यहाँ घूम सकते?अच्छा यह बताओ जो पडोसी मुल्क से गोलाबारी होती है उससे कौन बचाता है?"

राशिद चुप रहा।

"बेटा यदि हम जुल्म करते तो उन लोगों को नहीं पकडते जो यहाँ पर दहशतगर्दी करते हैं।"महेन्दर ने उसके कंधे पर हाथ रखकर कहा।

राशिद बिना जवाब दिए वहाँ से चला गया।बच्चे के दिमाग में किस तरह से जहर भरा जा रहा है यह देखकर महेन्दर का मन विचलित हो गया।

वह अन्य साथियों के साथ आगे बढ़ने लगा।

इस घटना को दो दिन बीत गए थे लेकिन महेन्दर का मन शांत नहीं था।वह घाटी के अंदर के अंदर फैले हुए जहर से अनभिज्ञ नहीं था।

जान हथेली पर लेकर चलनेवाले सैनिकों को यह भी नहीं मालूम कि अगले पल उनके साथ क्या हो जाये फिर भी वह अपने देश की रक्षा की प्रतीज्ञा लिए अपने धर्म को निभा रहे है.

कुछ बडा होने वाला है ऐसी खबरें उन तक पहुंच चुकी थी जिस पर खुफिया एजेंसियों की मोहर लग चुकी थी।हर समय चौकन्ना रहने की जरूरत थी।

कुछ लोगों की संदिग्ध पहचान कर ली गई थी और उसे ही अंजाम देना बाकी था.

शाम धुंधलाने लगी थी।एक खामोशी चारों तरफ पसर चुकी थी।कुछ लोग जिनकी संख्या लगभग छह थी चौकस निगाहों के साथ एक जगह जमा हो गए।

गांव की गलियों में सन्नाटा पसर गया।

तभी एक फायर हुआ।वह सभी तितर बितर हो गए व एक मकान की ओट ले ली।

दोनों तरफ से फायरिंग होने लगी।

एक आदमी का शरीर नीचे गिरा।यह देखकर उसका साथी बौखला गया और एक हैंडग्रेनेड उछाल दिया।तभी एक जिस्म उछला और उस ग्रेनेड को जमीन पर गिरने से पहले हाथ में ले वापस उस ओर ही फेंक दिया।

यह   महेन्दर था जो अपनी ब्रिगेड के साथ वहां मौजूद था।

"हमें यहाँ से निकलने दो वरना इस मकान में मौजूद सभी लोगों को मार दिया जायेगा!" एक आवाज गूंजी।

फायरिंग रोक दी गई।

"देखो!तुम लोगों को चारों तरफ से घेर लिया गया है खैरियत इसी में है कि खुद को हमारे हवाले कर दो।"एक कडकती आवाज के साथ महेन्दर ने कहा

कुछ देर सन्नाटा… फिर एक फायर हुआ.

मकान के अंदर से चीखने चिल्लाने की आवाजें आने लगी।महेन्दर ने साथी को इशारा किया और धीरे धीरे सरकने लगा

मकान से लगातार फायरिंग हो रही थी।

महेश ने अंदाजा लगाया अंदर दो आतंकवादी मौजूद थे क्योंकि फायरिंग दो बार में हो रही थी।

बाकी आतंकवादी आस पास के ही घरों में या फिर नजदीक ही थे।

सैनिक सतर्क थे।फायरिंग रोक कर वह अपनी पोजीशन बदलने लगे।रात गहरा गई थी।

सब तरफ खामोशी थी।

तभी कुत्ते के भौंकने की आवाज एक दिशा से आई।

इधर से फायरिंग हुई और उधर से चीख निकली।दोबारा उस ओर से लगातार फायरिंग होने लगी।

अचानक मकान के अंदर से आवाजे और तेज हो गई और फिर सन्नाटा छा गया.

सैनिकों की मुश्तैदी से दो आतंकवादीयों को पकड़ लिया।एक के पैर और एक के हाथ पर गोली लगी थी।

तभी मकान के अंदर से तेज आवाज आई..

"भारत माता की जय!"दरवाजा खुला और महेन्दर एक बच्चे को पकडे बाहर आया।

वह थोडा लडखडाया।एक सैनिक ने उसे थाम लिया।

पेट के नजदीक गोली लगी हुई थी और वह बच्चा उसके खून को रोकने की कोशिश कर रहा था.

घर की औरतें सहमी हुई थी.महेन्दर को तुरंत जीप में डालकर ले जाया गया।

यह एक सफल ऑपरेशन था।सारे आतंकवादी सेना के कब्जे में थे चार मुर्दा और दो जिंदा।

बताई गई जगहों पर छापेमारी से सहयोगियों को भी पकड लिया गया।

सेना की सफलता की कहानी न्यूज चैनलों पर चल रही थी।महेन्दर के घायल होने की खबर भी।

देश में उसके लिए एक जोश का माहौल बन गया था और सभी उसके लिए प्रार्थना कर रहे थे।

इस प्रार्थना में दो हाथ और शामिल थे और वह राशिद के थे।

वह रोज पैट्रोलिंग करते हुए सैनिकों से उसके बारें में पता करता।

उसकी आँखों में अब बदलाव था।

पंद्रह दिन बाद एक जीप राशिद के घर के बाहर रूकी।वह कंकडों को फेंक फेंक कर खेल रहा था।सामने जीप से उतरते महेन्दर को देखकर उसकी ओर दौड पडा और कस कर पकड़ लिया।

"आप ठीक हो गए?"राशिद ने उत्सुकता से कहा।

"हाँ मैं ठीक हो गया हूँ लेकिन तुम बताओ तुम्हारी अम्मी तुम्हारी आपा कैसी है?"

"सब ठीक है मैं भी बिल्कुल ठीक हूँ देखो।"उसने अपनी बाँह फैलाकर कहा।

"अच्छा अब बताओ,हम फौजी क्या सच में जुल्म करते हैं?"महेन्दर ने उससे कहा।

"नहीं….मैं सब समझ गया हूँ।आप अच्छे हो और मददगार भी।पर अम्मी ने फौज को ऐसा क्यों कहा था?"राशिद ने सवाल किया.

"वह मेरी गलती थी राशिद।"पीछे से राशिद की अम्मी बोली।

उनकी आँखों में एक शर्मिंदगी थी जो महेश ने महसूस की।

"उस रात जब फौज की गोली का शिकार राशिद के अब्बू हुए तब यह जानते हुए भी कि वह इन दहशतगर्दों के मददगार है फौज को ही दोषी समझती रही और राशिद को भी यही समझाती रही।"

इतना कहकर वह सिसक उठी।तब तक एक लड़की वहाँ पर आकर खडी हो गई।वह कुछ सहमी हुई थी।

"समय पर अगर फौज न आती तो गजाला की आ…!"राशिद की अम्मी ने गजाला को गले लगाकर कहा।

"देखिए आप रोए नहीं।हमने सिर्फ अपना फर्ज पूरा किया।मुझे खुशी है कि आप लोगों के मन से फौजियों के लिए गलतफहमी हटी।"महेन्दर ने कहा और राशिद के हाथ में एक पैकेट पकडा दिया।

सवालिया निगाहों से राशिद ने महेन्दरको देखा।

"इसमें किताबें और बैग है।कल से स्कूल जाना क्योंकि गाँव का स्कूल कल से खुल जायेगा।"महेन्दर ने कहा और जीप में बैठ गया।

जीप आगे बढ़ने लगी।

"मैं भी फौजी बनूंगा..!!!"राशिद ने चिल्ला कर पीछे से कहा।महेन्दर की आँखों के सामने उसका बचपन दौड़ता हुआ दिखने लगा और वह मन ही मन मुस्कुरा दिया।

दिव्या  शर्मा।

(स्वलिखित, मौलिक)


गुरुग्राम हरियाणा।



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